जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय (Jainendra Kumar ka Jeevan Parichay)

जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय | कक्षा 12 | हिंदी अनिवार्य | Jainendra Kumar ka Jeevan Parichay Class 12

नमस्ते विद्यार्थियों! ‘हिंदी की पाठशाला’ में आपका स्वागत है। इस लेख में हम कक्षा 12 हिंदी (आरोह भाग-2) के गद्य खंड के प्रमुख लेखक जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय (Jainendra Kumar ka Jeevan Parichay) विस्तार से दे रहे हैं। यह परिचय आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जैनेंद्र कुमारः संक्षिप्त परिचय

विवरणजानकारी
पूरा नाम जैनेंद्र कुमार
जन्म / निधन सन् 1905 (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश) / सन् 1990
युगप्रेमचंदोत्तर युग (मनोवैज्ञानिक कथाकार)
प्रमुख रचनाएँ त्यागपत्र (उपन्यास), पाज़ेब (कहानी), बाज़ार दर्शन (निबंध)
भाषा-शैली सरल, अनौपचारिक, मनोवैज्ञानिक, गांधीवादी चिंतन
मुख्य सम्मान साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत-भारती सम्मान, पद्मभूषण

जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय (विस्तृत)

जीवन परिचय

हिंदी साहित्य में प्रेमचंद के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण कथाकार के रूप में प्रतिष्ठित जैनेंद्र कुमार का जन्म सन् 1905 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था।

कथाकार होने के साथ-साथ जैनेंद्र की पहचान एक अत्यंत गंभीर चिंतक की भी रही है। उनका अवदान बहुत व्यापक और वैविध्यपूर्ण है। भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। सन् 1990 में उनका निधन हो गया।

साहित्यिक परिचय

जैनेंद्र कुमार ने अपने उपन्यासों और कहानियों के माध्यम से हिंदी में एक सशक्त मनोवैज्ञानिक कथा-धारा का प्रवर्तन किया। ‘परख’ और ‘सुनीता’ के बाद 1937 में प्रकाशित ‘त्यागपत्र’ ने उन्हें मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार के रूप में बड़ी प्रतिष्ठा दिलाई।

उन्होंने अपनी सरल और अनौपचारिक-सी दिखने वाली शैली में समाज, राजनीति, अर्थनीति एवं दर्शन से संबंधित गहन प्रश्नों को सुलझाने की कोशिश की। वे गांधीवादी चिंतन-दृष्टि से गहरे प्रभावित थे और उसका सहज उपयोग अपने लेखन में करते थे।

प्रमुख रचनाएँ

(i) उपन्यास: परख, अनाम स्वामी, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, जयवर्द्धन, मुक्तिबोध।

(ii) कहानी-संग्रह: वातायन, एक रात, दो चिड़िया, फाँसी, नीलम देश की राजकन्या, पाज़ेब।

(iii) विचार-प्रधान निबंध-संग्रह: प्रस्तुत प्रश्न, जड़ की बात, पूर्वोदय, साहित्य का श्रेय और प्रेय, सोच-विचार, समय और हम।

प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान

जैनेंद्र कुमार को साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया:

  • साहित्य अकादेमी पुरस्कार
  • भारत-भारती सम्मान
  • भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण

भाषा-शैली

जैनेंद्र कुमार की भाषा-शैली अत्यंत सरल, सहज और अनौपचारिक है। उन्होंने अपनी रचनाओं में आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करते हुए गहन दार्शनिक बातों को भी आसानी से समझाया है। उनकी शैली मनोवैज्ञानिक है, जो पात्रों के मन के भीतर के द्वंद्व और विचारों को गहराई से प्रस्तुत करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जैनेंद्र कुमार को हिंदी में ‘प्रेमचंद के बाद’ सबसे महत्त्वपूर्ण कथाकार माना जाता है। उन्होंने हिंदी में एक ‘सशक्त मनोवैज्ञानिक कथा-धारा’ का प्रवर्तन किया।

सन् 1937 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘त्यागपत्र’ ने उन्हें मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार के रूप में प्रभूत प्रतिष्ठा दिलाई।

जैनेंद्र कुमार को उनके साहित्यिक योगदान के लिए ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘भारत-भारती सम्मान’ और भारत सरकार द्वारा ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया।

उनके प्रमुख उपन्यासों में ‘परख’, ‘सुनीता’ और ‘त्यागपत्र’ शामिल हैं। उनकी प्रसिद्ध कहानियों में ‘पाज़ेब’ और ‘नीलम देश की राजकन्या’ हैं, तथा ‘बाज़ार दर्शन’ उनका एक महत्त्वपूर्ण निबंध है।

जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय PDF

विद्यार्थियों की सुविधा के लिए, हमने जैनेंद्र कुमार के जीवन परिचय के सभी मुख्य बिंदुओं को एक PDF फाइल में संकलित किया है।

(इस PDF में आपको बोनस के तौर पर ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ का सारांश और प्रश्न-उत्तर भी मिलेंगे।)

इस लेख में, हमने कक्षा 12 हिंदी के लिए जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय विस्तार से प्रस्तुत किया है। यह (Jainendra Kumar ka Jeevan Parichay) आपकी परीक्षा के लिए एक संपूर्ण गाइड है, जिसमें उनके जीवन, साहित्यिक योगदान, रचनाओं और भाषा-शैली को शामिल किया गया है।

हम आशा करते हैं कि जैनेंद्र कुमार के जीवन परिचय पर आधारित यह लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा। यदि परीक्षा में जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय पूछा जाता है, तो आप इसे आसानी से लिख पाएंगे।

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