महादेवी वर्मा का जीवन परिचय कक्षा 12 | हिंदी अनिवार्य | Mahadevi Verma ka Jeevan Parichay Class 12
नमस्ते विद्यार्थियों! ‘हिंदी की पाठशाला’ में आपका स्वागत है। इस लेख में हम कक्षा 12 हिंदी (आरोह भाग-2) की प्रमुख लेखिका महादेवी वर्मा का जीवन परिचय परिचय (Mahadevi Verma ka Jeevan Parichay) विस्तार से दे रहे हैं। यह परिचय आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे
महादेवी वर्माः संक्षिप्त परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | महादेवी वर्मा (उपनाम: ‘आधुनिक युग की मीरा’) |
| जन्म / निधन | सन् 1907 (फर्रुखाबाद) / सन् 1987 (इलाहाबाद) |
| युग | छायावाद (चतुर्थ स्तंभ) |
| प्रमुख रचनाएँ | यामा (काव्य), स्मृति की रेखाएं (रेखाचित्र), श्रृंखला की कड़ियां (निबंध) |
| भाषा-शैली | संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली, चित्रात्मक और गीतात्मक शैली |
| मुख्य सम्मान | ज्ञानपीठ (1983), पद्मभूषण (1956), भारत भारती |
महादेवी वर्मा का जीवन परिचय (विस्तृत)
जीवन परिचय
‘आधुनिक युग की मीरा’ और छायावाद की चतुर्थ स्तंभ महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के फरुखाबाद जनपद में हुआ था।
बचपन से ही चित्रकला, संगीतकला व काव्यकला की ओर उन्मुख महादेवी को विद्यार्थी जीवन से ही काव्य प्रतिष्ठा मिली। इन्होंने नारी समाज में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रयाग महिला विद्यापीठ की स्थापना की तथा लंबे समय तक इसकी प्राचार्या भी रहीं। सन् 1987 में इलाहाबाद में उनका निधन हो गया।
साहित्यिक परिचय
महादेवी वर्मा की प्रतिष्ठा साहित्य सेवी और समाज सेवी, दोनों रूपों में रही है। इनकी प्रतिभा कविता और गद्य दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हुई। कविताओं में इन्होंने अपनी आंतरिक वेदना और पीड़ा को अभिव्यक्त किया है, तो गद्य रचनाओं में गहरा सामाजिक सरोकार स्थान पाता है। इन्होंने अपनी रचनाओं में समाज के शोषित-पीड़ित वर्ग को स्थान दिया है और उनके जीवन को नायकत्व प्रदान किया है।
प्रमुख रचनाएँ
(i) संस्मरण/रेखाचित्र: स्मृति की रेखाएं, अतीत के चलचित्र, पथ के साथी, मेरा परिवार।
(ii) काव्य संग्रह: यामा, नीहार, नीरजा, रश्मि, सांध्यगीत, दीपशिखा ।
(iii) निबंध संग्रह: श्रृंखला की कड़ियां, आपदा, संकल्पित, भारतीय संस्कृति के स्वर।
प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान
महादेवी वर्मा को साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया:
- इनको सन् 1983 ई. में ‘यामा’ काव्य संग्रह के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
- सन् 1956 . में पद्मभूषण से सम्मानित हुई।
- आपको भारत भारती सम्मान भी प्राप्त हुआ।
भाषा-शैली
महादेवी वर्मा की भाषा-शैली उनके गद्य और पद्य में विशिष्ट स्थान रखती है:
- भाषा: उनकी भाषा शुद्ध, साहित्यिक और संस्कृतनिष्ठ (तत्सम) खड़ी बोली है। इसमें भावों को व्यक्त करने की अद्भुत क्षमता है।
- शैली (काव्य): उनकी काव्य शैली मुख्यतः गीतात्मक और छायावादी है, जिसमें वेदना, करुणा और भावनात्मक गहनता के दर्शन होते हैं।
- शैली (गद्य): गद्य (विशेषकर संस्मरण और रेखाचित्र) में उनकी शैली चित्रात्मक है। वे शब्दों से ऐसा चित्र खींच देती हैं कि पाठक के मन पर वह अमिट छाप छोड़ जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
महादेवी वर्मा का जीवन परिचय PDF (Download)
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए, हमने महादेवी वर्मा के जीवन परिचय के सभी मुख्य बिंदुओं को एक PDF फाइल में संकलित किया है।
(इस PDF में आपको ‘भक्तिन’ पाठ का सारांश और प्रश्न-उत्तर भी बोनस के तौर पर मिलेंगे।)
यह लेख महादेवी वर्मा का जीवन परिचय (Mahadevi Verma ka Jeevan Parichay) का एक संपूर्ण विश्लेषण प्रदान करता है। इसमें उनके जीवन, छायावादी युग में उनके योगदान, प्रमुख रचनाओं (जैसे यामा, स्मृति की रेखाएं), और भाषा-शैली को परीक्षा के दृष्टिकोण से शामिल किया गया है।
हम आशा करते हैं कि महादेवी वर्मा के जीवन परिचय पर आधारित यह लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा। यदि परीक्षा में महादेवी वर्मा का जीवन परिचय पूछा जाता है, तो आप इसे आसानी से लिख पाएंगे।
