भक्तिन NCERT समाधान | Bhaktin Question Answer | महादेवी वर्मा | कक्षा 12 हिंदी
नमस्ते विद्यार्थियों! ‘हिंदी की पाठशाला’ में आपका स्वागत है। इस लेख में, हम कक्षा 12 हिंदी अनिवार्य की पुस्तक ‘आरोह भाग-2’ के गद्य खंड के पाठ 10, ‘भक्तिन’ (लेखिका : महादेवी वर्मा) के लिए एक सम्पूर्ण गाइड प्रदान कर रहे हैं। यहाँ आपको भक्तिन NCERT समाधान (Bhaktin Question Answer) के साथ-साथ, ‘पाठ के आसपास’ और ‘भाषा की बात’ के हल मिलेंगे।
इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे
पाठ अवलोकन
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कक्षा | 12 |
| विषय | हिंदी (अनिवार्य) |
| पुस्तक | आरोह भाग-2 (गद्य खंड) |
| पाठ संख्या | 10 |
| पाठ का नाम | भक्तिन |
| लेखिका | महादेवी वर्मा |
| विधा | संस्मरणात्मक रेखाचित्र |
लेखिका परिचयः महादेवी वर्मा
‘आधुनिक युग की मीरा’ और छायावाद की चतुर्थ स्तंभ महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में हआ था। साहित्य सेवी और समाज सेवी दोनों रूपों में प्रतिष्ठित महादेवी जी ने नारी समाज में शिक्षा-प्रसार के लिए ‘प्रयाग महिला विद्यापीठ’ की स्थापना की।
पाठ सारांश: भक्तिन
‘ भक्तिन’ महादेवी वर्मा जी का एक प्रसिद्ध संस्मरणात्मक रेखाचित्र है, जो ‘स्मृति की रेखाएँ’ में संकलित है। यह कहानी भक्तिन नाम की एक ऐसी औरत की है, जिसने अपना पूरा जीवन संघर्ष और स्वाभिमान से जिया। इसमें लेखिका ने भक्तिन के अतीत और अपने साथ उसके अनूठे रिश्ते का वर्णन किया है।
सप्रसंग व्याख्याः भक्तिन
‘भक्तिन’ पाठ के महत्वपूर्ण गद्यांशों का विस्तृत विश्लेषण पढ़ें। इसमें परीक्षा के लिए उपयोगी सभी अंशों का संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या और विशेष शामिल है, जो आपको परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने में मदद करेगा।
मूल भाव / प्रतिपाद्य
मूल भाव (पाठ क्या सिखाता है): ‘भक्तिन’ पाठ हमें एक ऐसी साधारण औरत की कहानी बताता है जिसका जीवन बहुत मुश्किलों भरा था। भक्तिन को समाज में, खासकर मर्दों की दुनिया में, बहुत भेदभाव और धोखेबाजी का सामना करना पड़ा। छोटी उम्र में शादी, पति का जल्दी गुजर जाना, बेटियों के कारण ताने सुनना, और रिश्तेदारों का संपत्ति हड़पने की कोशिश करना – ये सब उसने झेला। लेकिन इन सबके बावजूद, भक्तिन ने कभी हार नहीं मानी। वह हिम्मत वाली थी, अपना सम्मान बचाकर रखती थी और मेहनत से अपना जीवन जीती थी। यह पाठ हमें सिखाता है कि औरतें कितनी मजबूत हो सकती हैं और कैसे वे मुश्किल हालात में भी अपनी पहचान बनाए रख सकती हैं।
प्रतिपाद्य (लेखिका क्या कहना चाहती हैं): इस पाठ के जरिए महादेवी वर्मा यह बताना चाहती हैं कि भक्तिन जैसी सीधी-सादी दिखने वाली औरतें भी अंदर से बहुत मजबूत, स्वाभिमानी और मेहनती होती हैं। भक्तिन पढ़ी-लिखी नहीं थी, लेकिन उसमें गजब की समझदारी और हिम्मत थी। लेखिका यह भी दिखाती हैं कि कैसे भक्तिन जैसी औरतें, जो समाज के बनाए नियमों के खिलाफ लड़ती हैं, असल में औरत के सम्मान और उसकी पहचान की आवाज़ बनती हैं। साथ ही, लेखिका अपने और भक्तिन के बीच के गहरे रिश्ते को भी दिखाती हैं, जहाँ नौकर-मालकिन का रिश्ता धीरे-धीरे माँ-बेटी या दोस्त जैसा बन जाता है।
NCERT समाधान (पाठ के साथ)
प्रश्न 1: भक्तिन अपना वास्तविक नाम लोगों से क्यों छुपाती थी? भक्तिन को यह नाम किसने और क्यों दिया होगा ?
उत्तर: भक्तिन का वास्तविक नाम ‘लछमिन’ अर्थात लक्ष्मी था, जो समृद्धि का प्रतीक है। परंतु उसका जीवन घोर गरीबी और संघर्षों से भरा था, जो उसके नाम के बिल्कुल विपरीत था। अपने नाम और जीवन की परिस्थितियों के इसी विरोधाभास के कारण वह अपना वास्तविक नाम छुपाती थी।
भक्तिन को यह ‘भक्तिन’ नाम संभवतः लेखिका महादेवी वर्मा ने दिया होगा। जब भक्तिन पहली बार लेखिका के पास आई, तो उसके गले में कंठी माला और सादगी देखकर, लेखिका ने उसे ‘भक्तिन’ कहना उचित समझा होगा।
प्रश्न 2: दो कन्या रत्न पैदा करने पर भक्तिन… (प्रश्न जारी)… क्या इससे आप सहमत हैं?
उत्तर: हाँ, कुछ हद तक यह बात सही लगती है कि समाज में अक्सर ऐसी स्थितियाँ देखने को मिलती हैं जहाँ एक औरत ही दूसरी औरत की उपेक्षा या उसके दुख का कारण बनती है, जैसा भक्तिन के साथ उसकी सास और जिठानियों ने किया।
लेकिन, इस सोच के पीछे असली कारण हमारे समाज का पुरुष-प्रधान ढाँचा (पितृसत्तात्मक सोच) है, जो सदियों से बेटों को बेटियों से ज़्यादा महत्व देता आया है।
प्रश्न 3: भक्तिन की बेटी पर पंचायत द्वारा जबरन पति थोपा जाना… सामाजिक परंपरा का प्रतीक है। कैसे ?
उत्तर: भक्तिन की बेटी पर पंचायत द्वारा जबरदस्ती पति थोपा जाना समाज की उस गलत सोच और परंपरा का प्रतीक है जहाँ लड़कियों को अपनी मर्जी से फैसला लेने या ‘ना’ कहने का अधिकार नहीं दिया जाता।
- मानवाधिकारों का हनन: पंचायत का यह फैसला लड़की के शादी से जुड़े मानवाधिकारों का सीधा-सीधा उल्लंघन था।
- पुरुषवादी सोच: पंचायत ने लड़की की सच्चाई जानने की बजाय सिर्फ इस बात पर फैसला सुना दिया कि वे एक कमरे से निकले थे, जो दिखाता है कि समाज पुरुषों का पक्ष लेता है।
प्रश्न 4: ‘भक्तिन अच्छी है,… (प्रश्न जारी)… लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर: लेखिका ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि भक्तिन में कुछ इंसानी कमजोरियाँ और छोटी-मोटी बुराइयाँ भी थीं:
- सच को छुपाना: वह बातों को अपनी मालकिन को खुश रखने के लिए थोड़ा बदल कर बताती थी।
- पैसों का हेरफेर: लेखिका के इधर-उधर पड़े पैसों को वह उठाकर भंडार-घर की मटकी में रख देती थी, जिसे वह चोरी नहीं मानती थी।
- शास्त्रों की मनमानी व्याख्या: जैसे उसने अपने सिर मुंडाने को सही ठहराने के लिए ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध’ कह दिया।
प्रश्न 5: भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया है?
उत्तर: लेखिका को औरतों का सिर मुंडवाना पसंद नहीं था। जब उन्होंने भक्तिन को रोका, तो भक्तिन ने अपनी आदत को सही ठहराने के लिए तुरंत अपनी सुविधानुसार शास्त्र का सहारा लेते हुए कहा ‘तीरथ गए मुँडाए सिद्ध।’ यह कहावत किस शास्त्र में लिखी है, यह जाने बिना ही भक्तिन ने इसे अपने सिर मुंडाने को जायज बताने के लिए इस्तेमाल किया।
प्रश्न 6: भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गई?
उत्तर: भक्तिन के आ जाने से महादेवी वर्मा अधिक देहाती इसलिए हो गई क्योंकि भक्तिन ने शहर के रहन-सहन को नहीं अपनाया, बल्कि धीरे-धीरे अपनी मालकिन (महादेवी जी) को ही गाँव के सीधे-सादे जीवन और खान-पान की आदतों में ढाल दिया।
- खान-पान: महादेवी जी शहरी नाश्ते की जगह मकई का दलिया, बाजरे के तिल वाले पुए, ज्वार के भुट्टे की खिचड़ी जैसे गाँव के खाने को पसंद करने लगीं।
- जीवन-शैली: भक्तिन की सादगी देखकर लेखिका भी ज्यादा साधारण तरीके से रहने लगीं।
पाठ के आसपास
प्रश्न 1: आलो आँधारि की नायिका और लेखिका बेबी हालदार और भक्तिन के व्यक्तित्व में आप क्या समानता देखते हैं?
उत्तर: बेबी हालदार और भक्तिन दोनों के जीवन और स्वभाव में कई बातें मिलती-जुलती हैं:
- संघर्ष भरा जीवन: दोनों ने ही अपने जीवन में बहुत गरीबी, मुश्किलें और समाज की उपेक्षा झेली।
- घरेलू सहायिका का काम: दोनों ही अपना गुजारा करने के लिए दूसरों के घरों में काम करती थीं।
- स्वाभिमान: दोनों ही अपनी इज्जत का ध्यान रखती थीं और अन्याय के खिलाफ (अपने-अपने तरीके से) आवाज़ उठाती थीं।
प्रश्न 2: भक्तिन की बेटी के मामले में जिस तरह का फ़ैसला पंचायत ने सुनाया, वह आज भी कोई हैरतअंगेज़ बात नहीं है। अखबारों या टी. वी. समाचारों में आनेवाली किसी ऐसी ही घटना को भक्तिन के उस प्रसंग के साथ रखकर उस पर चर्चा करें।
उत्तर: भक्तिन की बेटी के मामले में पंचायत का फैसला आज के समय में भी सच लगता है। आज भी कई गाँवों में ‘खाप पंचायतें’ ऐसे ही गलत फैसले सुना देती हैं, जहाँ लड़कियों की मर्जी का ध्यान नहीं रखा जाता। अखबारों और टीवी में हम अक्सर ऐसी खबरें देखते हैं जो भक्तिन के समय की सामाजिक सोच को ही दर्शाती हैं। (यह प्रश्न विद्यार्थियों को कक्षा में चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित करता है।)
प्रश्न 3: पाँच वर्ष की वय में ब्याही जानेवाली लड़कियों में सिर्फ़ भक्तिन नहीं है, बल्कि आज भी हज़ारों अभागिनियाँ हैं। बाल-विवाह और उम्र के अनमेलपन वाले विवाह की अपने आस-पास हो रही घटनाओं पर दोस्तों के साथ परिचर्चा करें।
उत्तर: यह सही है कि बाल-विवाह आज भी समाज की एक कड़वी सच्चाई है। भक्तिन की तरह आज भी कई लड़कियों का बचपन छीन लिया जाता है। (यह प्रश्न भी विद्यार्थियों को आपस में बातचीत करने और इस सामाजिक बुराई पर सोचने के लिए दिया गया है।)
प्रश्न 4: महादेवी जी इस पाठ में हिरनी सोना, कुत्ता बसंत, बिल्ली गोधूलि आदि के माध्यम से पशु-पक्षी को मानवीय संवेदना से उकेरने वाली लेखिका के रूप में उभरती हैं। उन्होंने अपने घर में और भी कई पशु-पक्षी पाल रखे थे तथा उन पर रेखाचित्र भी लिखे हैं। शिक्षक की सहायता से उन्हें ढूँढ़कर पढ़ें। जो ‘मेरा परिवार’ नाम से प्रकाशित है।
उत्तर: महादेवी वर्मा जी को पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। ‘मेरा परिवार’ नामक उनकी कृति में गौरा (गाय), नीलकंठ (मोर), गिल्लू (गिलहरी), सोना (हिरनी), और नीलू (कुत्ता) जैसे कई जानवरों के अद्भुत और भावपूर्ण रेखाचित्र हैं, जिन्हें पढ़कर पता चलता है कि वे जानवरों को भी इंसानों जैसा ही समझती थीं।
भाषा की बात
प्रश्न 1: नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोगों के उदाहरणों को ध्यान से पढ़िए और इनकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए- (क) पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले (ख) खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी (ग) अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण दृष्टियाँ
उत्तर:
(क) पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले: अर्थ छवि: यहाँ ‘संस्करण’ (version) शब्द का इस्तेमाल व्यंग्य में किया है। जैसे किसी किताब के नए संस्करण छपते हैं, वैसे ही भक्तिन ने पहली बेटी के बाद दो और बेटियों को जन्म दिया। यह उस समाज की सोच पर चोट करती है जहाँ बेटे की चाहत होती है।
(ख) खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी: अर्थ छवि: पुराने जमाने में बेटों को ‘खरा सिक्का’ (कीमती) और बेटियों को ‘खोटा सिक्का’ (बेकार) समझा जाता था। ‘टकसाल’ (जहाँ सिक्के बनते हैं) कहने का मतलब है कि वह सिर्फ बेटियों को ही जन्म दे रही थी।
(ग) अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण दृष्टियाँ: अर्थ छवि: जब भक्तिन मायके पहुंची, तो गाँव वाले सीधे-सीधे बुरी खबर नहीं दे रहे थे, बल्कि कानाफूसी कर रहे थे (‘हाय लछमिन अब आई’)। यह ‘अस्पष्ट पुनरावृत्ति’ थी, लेकिन उनकी आँखों में जो दुख और सहानुभूति साफ दिख रही थी, वह ‘स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण दृष्टि’ थी।
प्रश्न 2: ‘बहनोई’ शब्द ‘बहन (स्त्री.)+ ओई’ से बना है। …ऐसे कुछ और शब्द और उनमें लगे पुं. प्रत्ययों की हिंदी तथा और भाषाओं में खोज करें।
उत्तर: हिंदी में स्त्रीलिंग शब्द से पुल्लिंग बनाने के कुछ और उदाहरण:
- नन्द (स्त्रीलिंग) + **ओई** = नन्दोई (पुल्लिंग)
- ननद (स्त्रीलिंग) + **ओई** = ननदोई (पुल्लिंग)
- रस (स्त्रीलिंग) + **इया** = रसिया (पुल्लिंग)
- दुःख (स्त्रीलिंग) + **इया** = दुखिया (पुल्लिंग/विशेषण)
प्रश्न 3: पाठ में आए लोकभाषा के इन संवादों को समझ कर इन्हें खड़ी बोली हिंदी में ढाल कर प्रस्तुत कीजिए।
(क) ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है, साग-भाजी छँउक सकित है, अउर बाकी का रहा।
खड़ी बोली: यह कौन-सी बड़ी बात है। रोटी बनाना जानती हूँ, दाल पका लेती हूँ, साग-सब्जी छौंक सकती हूँ, और बाकी क्या रहा।
(ख) हमारे मालकिन तौ रात-दिन कितबियन माँ गड़ी रहती हैं। अब हमहूँ पढ़े लागब तो घर-गिरिस्ती कउन देखी-सुनी।
खड़ी बोली: हमारी मालकिन तो रात-दिन किताबों में ही लगी रहती हैं। अब हम भी पढ़ने लगेंगे तो घर-गृहस्थी कौन देखेगा-सुनेगा।
(ग) ऊ बिचरिअउ तौ रात-दिन काम माँ झुकी रहती हैं, अउर तुम पचै घूमती-फिरती हौ, चलौ तनिक हाथ बटाय लेउ।
खड़ी बोली: वह बेचारी तो रात-दिन काम में झुकी रहती हैं, और तुम लोग घूमते-फिरते हो, चलो थोड़ा हाथ बँटा लो।
(घ) तब ऊ कुच्छौ करिहैं-धरिहैं ना-बस गली-गली गाउत-बजाउत फिरिहैं।
खड़ी बोली: तब वह कुछ करेंगे-धरेंगे नहीं, बस गली-गली गाते-बजाते फिरेंगे।
(ङ) तुम पचै का का बताई- यहै पचास बरिस से संग रहित है।
खड़ी बोली: तुम लोगों को क्या-क्या बताऊँ, यही पचास बरस से साथ रहती हूँ।
(च) हम कुकुरी बिलारी न होयँ, हमार मन पुसाई तौ हम दूसरा के जाब नाहिं त तुम्हार पचै की छाती पै होरहा भूजब और राज करब, समुझे रहौ।
खड़ी बोली: हम कोई कुतिया-बिल्ली नहीं हैं, हमारा मन मानेगा तो हम दूसरे (के घर) जाएँगे, नहीं तो तुम्हारी छाती पर ही मूँग दलेंगे (यानि यहीं रहकर तुम्हें परेशान करेंगे) और राज करेंगे, समझ लेना।
प्रश्न 4: भक्तिन पाठ में ‘पहली कन्या के दो संस्करण’ जैसे प्रयोग… (प्रश्न जारी)… ऐसे प्रयोग भाषा की समृद्धि में कहाँ तक सहायक है?
उत्तर: इन वाक्यों में तीन अलग-अलग क्षेत्रों की शब्दावली का प्रयोग हुआ है:
- पहला वाक्य (वायरस, सिस्टम, हैंग): यह कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी की शब्दावली है।
- दूसरा वाक्य (इनस्विंगर, फाउल, रेड कार्ड, पवेलियन): यह खेल (विशेषकर क्रिकेट और फुटबॉल) की शब्दावली है।
- तीसरा वाक्य (जानी, टेंसन, अपुन, हैडमास्टर): यह ‘बंबइया हिंदी’ या मुंबई की आम बोलचाल की भाषा की शब्दावली है।
ऐसे प्रयोग निश्चित रूप से भाषा की समृद्धि में सहायक होते हैं। वे भाषा को जीवंत, आधुनिक और अधिक expressive बनाते हैं, जिससे वक्ता अपनी बात को ज़्यादा सटीक और प्रभावशाली ढंग से कह पाता है।
महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (परीक्षा अभ्यास)
RBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार ‘भक्तिन’ पाठ के सभी महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (MCQ, अति लघु, लघु, और दीर्घ) का अभ्यास करें। यह संग्रह आपकी परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने और पूरे अंक लाने के लिए विशेष रूप से बनाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भक्तिन NCERT समाधान PDF (Download)
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए, हमने ‘भक्तिन’ पाठ के सभी NCERT समाधान को एक PDF फाइल में संकलित किया है।
(इस PDF में आपको पाठ का सारांश और अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर भी बोनस के तौर पर मिलेंगे।)
इस लेख में कक्षा 12 हिंदी ‘भक्तिन’ पाठ के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। हमने विस्तृत भक्तिन NCERT समाधान (Bhaktin Question Answer), ‘पाठ के आसपास’ और ‘भाषा की बात’ के हल प्रदान किए हैं।
हम आशा करते हैं कि ‘भक्तिन’ पाठ के लिए यह विस्तृत NCERT समाधान और अध्ययन सामग्री आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी। ‘हिंदी की पाठशाला’ का उद्देश्य आपको सटीक और समझने में आसान संसाधन उपलब्ध कराना है।
