बाज़ार दर्शन पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर | Bazar Darshan Important Questions | कक्षा 12 हिंदी
नमस्ते विद्यार्थियों! ‘हिंदी की पाठशाला’ में आपका स्वागत है। इस लेख में, हम कक्षा 12 हिंदी ‘आरोह भाग-2’ के पाठ ‘बाज़ार दर्शन’ से परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Important Questions) का संग्रह प्रदान कर रहे हैं। यह बाज़ार दर्शन पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (Bazar Darshan Important Questions) आपकी परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत उपयोगी हैं।
इस लेख में आप क्या पढ़ेंगे
पाठ अवलोकन
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पाठ का नाम | बाज़ार दर्शन |
| लेखक | जैनेंद्र कुमार |
| विधा | विचार-प्रधान निबंध |
| मुख्य पात्र | भगत जी (संतोष के प्रतीक) |
बहुचयनात्मक प्रश्न (MCQ)
1. ‘पर्चेजिंग पावर’ का क्या अर्थ है?
2. लेखक के अनुसार ‘मन खाली’ होने का क्या अर्थ है?
3. भगत जी बाज़ार से क्या खरीदते थे?
4. लेखक ने ‘अनीति-शास्त्र’ किसे कहा है?
5. ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के लेखक कौन हैं?
अति लघुत्तरात्मक प्रश्न (उत्तर सीमा 20 शब्द)
प्रश्न 1: बाज़ार का जादू किस राह काम करता है?
उत्तर: बाज़ार का जादू आँखों के रास्ते (आँख की राह) काम करता है और सीधा मन पर असर डालता है।
प्रश्न 2: लेखक के दूसरे मित्र बाज़ार से खाली हाथ क्यों लौट आए?
उत्तर: क्योंकि वे बाज़ार में ‘सब कुछ’ खरीदना चाहते थे, और ‘कुछ’ खरीदने का अर्थ ‘सब कुछ’ छोड़ना था, इसलिए वे दुविधा में कुछ भी नहीं खरीद पाए।
प्रश्न 3: भगत जी रोज़ाना कितनी कमाई होते ही चूरन बेचना बंद कर देते थे?
उत्तर: भगत जी की रोज़ाना छह आने की कमाई होते ही वे बचा हुआ चूरन बच्चों में मुफ़्त बाँट देते थे।
प्रश्न 4: बाज़ार को सार्थकता कौन लोग देते हैं?
उत्तर: जो लोग यह ठीक-ठीक जानते हैं कि वे क्या खरीदना चाहते हैं (यानी ‘भरे मन’ वाले लोग) ही बाज़ार को सार्थकता देते हैं।
प्रश्न 5: ‘बाज़ारूपन’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘बाज़ारूपन’ का अर्थ है बाज़ार में कपट, दिखावा और सद्भाव की कमी होना, जहाँ व्यवहार केवल ग्राहक और विक्रेता का रह जाता है।
प्रश्न 6: लेखक ने ‘शैतान का जाल’ किसे कहा है?
उत्तर: लेखक ने बाज़ार के आकर्षक रूप और उसकी सजावट को ‘शैतान का जाल’ कहा है, जो ग्राहकों को फँसा लेता है।
लघुत्तरात्मक प्रश्न (उत्तर सीमा 40 शब्द)
प्रश्न 1: ‘जेब भरी हो और मन खाली हो’ से लेखक का क्या आशय है?
उत्तर: इसका आशय है कि व्यक्ति के पास पैसे (पर्चेजिंग पावर) तो बहुत हैं, लेकिन उसे यह स्पष्ट नहीं पता कि उसकी ज़रूरत क्या है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति बाज़ार के जादू में फँसकर फालतू और अनावश्यक खरीदारी कर लेता है।
प्रश्न 2: पैसे की ‘व्यंग्य-शक्ति’ से लेखक का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: पैसे की ‘व्यंग्य-शक्ति’ उसका मूक प्रहार है। जब पास से धूल उड़ाती मोटर गुज़रती है, तो वह पैदल चलने वाले व्यक्ति के मन में हीनता, ईर्ष्या और अपने सगे-संबंधियों के प्रति कृतघ्नता का भाव जगा देती है। यह पैसे की मूक चोट ही उसकी व्यंग्य-शक्ति है।
प्रश्न 3: बाज़ार का जादू उतरने पर क्या पता चलता है?
उत्तर: बाज़ार का जादू उतरने पर यह पता चलता है कि जो फैंसी चीज़ें बहुत आराम देने वाली समझकर खरीदी गई थीं, वे वास्तव में आराम में मदद नहीं, बल्कि बाधा (खलल) ही डाल रही हैं। इससे व्यक्ति का स्वाभिमान नहीं, बल्कि अहंकार ही तुष्ट होता है।
प्रश्न 4: भगत जी का आचरण बाज़ार को कैसे सार्थकता प्रदान करता है?
उत्तर: भगत जी बाज़ार का उपयोग केवल अपनी वास्तविक ज़रूरत (जीरा और काला नमक) को पूरा करने के लिए करते हैं। वे न तो फालतू खरीदते हैं और न ही बाज़ार के कपट (बाज़ारूपन) को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार वे बाज़ार के असली उद्देश्य (आवश्यकता पूर्ति) को सार्थक करते हैं।
प्रश्न 5: लेखक के मित्र ने अपनी फालतू खरीदारी का दोष पत्नी पर क्यों मढ़ा?
उत्तर: लेखक के मित्र ने अपनी फालतू खरीदारी का दोष पत्नी पर मढ़ दिया क्योंकि यह अपनी गलती छिपाने का एक सामान्य बहाना है। लेखक के अनुसार, खरीदारी का मूल कारण ‘मनीबैग’ अर्थात् ‘पैसे की गरमी’ (पर्चेजिंग पावर) थी, जिसे वे स्वीकार नहीं करना चाहते थे।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (उत्तर सीमा 60-80 शब्द)
प्रश्न 1: भगत जी के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भगत जी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ हैं: संतोष और संयम। वे एक दृढ़-निश्चयी व्यक्ति हैं, जिन्हें अपनी ज़रूरतों का स्पष्ट ज्ञान है। वे प्रतिदिन केवल छह आने कमाते हैं और उससे अधिक कमाने का लालच नहीं करते। वे ‘भरे मन’ से बाज़ार जाते हैं, इसलिए बाज़ार का आकर्षण (जादू) उन्हें डिगा नहीं पाता। वे केवल अपनी ज़रूरत का जीरा और काला नमक खरीदते हैं। उनका चरित्र सामाजिक शांति और सद्भाव का प्रतीक है।
प्रश्न 2: ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के आधार पर ‘बाज़ारूपन’ को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘बाज़ारूपन’ का अर्थ है बाज़ार में कपट और सद्भाव का अभाव होना। यह तब बढ़ता है जब बाज़ार अपनी सार्थकता (ज़रूरत पूरी करना) खो देता है। जब विक्रेता ग्राहक को ठगने के लिए ‘शैतान का जाल’ बिछाता है और ग्राहक अपनी ‘पर्चेजिंग पावर’ का प्रदर्शन करने के लिए फालतू चीज़ें खरीदता है, तब बाज़ार में ‘बाज़ारूपन’ बढ़ जाता है। इसमें सद्भाव की जगह शोषण ले लेता है और संबंध केवल ग्राहक-विक्रेता का रह जाता है।
प्रश्न 3: ‘मन खाली’ और ‘मन बंद’ होने में क्या अंतर है? लेखक ने किसे सही नहीं माना है?
उत्तर: ‘मन खाली’ होने का अर्थ है जब हमें अपनी ज़रूरत का स्पष्ट पता नहीं होता और हम बाज़ार के आकर्षण में फँस जाते हैं। ‘मन बंद’ होने का अर्थ है हठपूर्वक अपनी सभी इच्छाओं को रोकना और बाज़ार से विमुख हो जाना। लेखक ने ‘मन बंद’ करने को सही नहीं माना है, क्योंकि यह हठयोग है और अवास्तविक है। मनुष्य की ज़रूरतें होती हैं, इसलिए मन को बंद नहीं किया जा सकता। लेखक ‘भरे मन’ (ज़रूरत का ज्ञान होना) को सही मानते हैं।
प्रश्न 4: लेखक ने अर्थशास्त्र को ‘अनीति-शास्त्र’ क्यों कहा है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक ने उस अर्थशास्त्र को ‘अनीति-शास्त्र’ कहा है जो केवल ‘पर्चेजिंग पावर’ और बाज़ार के लाभ पर केंद्रित है। ऐसा अर्थशास्त्र जब ‘बाज़ारूपन’ (कपट और शोषण) को बढ़ावा देता है और लोगों के बीच मानवीय सद्भाव को नष्ट करता है, तब वह नैतिकता के विरुद्ध हो जाता है। जो शास्त्र केवल लाभ को देखता है, मानवता या नैतिकता को नहीं, वह लेखक की दृष्टि में ‘मायावी’ और ‘अनीति-शास्त्र’ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बाज़ार दर्शन महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर PDF
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए, हमने ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ के सभी महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर को एक PDF फाइल में संकलित किया है।
(इस PDF में आपको बोनस के तौर पर पाठ का सारांश, लेखक परिचय और MCQ भी मिलेंगे।)
यह लेख कक्षा 12 हिंदी ‘बाज़ार दर्शन’ के लिए एक संपूर्ण बाज़ार दर्शन पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (Bazar Darshan Important Questions) गाइड है। इसमें RBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार सभी प्रकार के प्रश्न (MCQ, अति लघु, लघु और दीर्घ) शामिल हैं।
हम आशा करते हैं कि बाज़ार दर्शन पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर का यह संग्रह आपकी परीक्षा की तैयारी में मदद करेगा। इन प्रश्नों का अभ्यास करके आप परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं।
