अलंकार- Alankar

इस लेख में हम कक्षा 12 हिंदी व्याकरण खंड का अलंकार (Alankar) पाठ पढ़ेंगे। बोर्ड परीक्षा में अलंकार पाठ से 2 अंक के प्रश्न पूछे जाते। तो आइये शुरू करते है।

अलंकार -परिभाषा और उदाहरण

Alankar

अलंकार -Alankar

जिस प्रकार शरीर की सुंदरता बढ़ाने के लिए आभूषण पहने जाते हैं, उसी प्रकार काव्य(कविता) में चमत्कार उत्पन्न करने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है।अर्थात काव्य की शोभा(सुंदरता) बढ़ाने वाले तत्वों को अलंकार Alankar कहते है।

अलंकार तीन प्रकार के होते है_

1 शब्दालंकार    2 अर्थालंकार   3 उभयालंकार 

अनुप्रास अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में वर्णों की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार होती है, तो वहां पर अनुप्रास अलंकार (Alankar)होता है।

उदहारण

(i) चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही थी जल-थल में।

यहां पर ‘च’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है।

(ii) गवान क्तों  की यंकर भूरि भीति गाइये।

यहां पर ‘भ’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है।

यमक अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में शब्दों की आवृत्ति हो, परंतु अर्थ भिन्न हो तो वहां पर यमक अलंकार (Alankar) होता है।

उदाहरण

(i) कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।        या खाये  बौराय  जग,  वा पाये   बौराय।।

यहां पर कनक शब्द की आवृत्ति हुई है परंतु अर्थ भिन्न है। यहां पर पहले कनक का अर्थ धतूरा और दूसरे कनक का अर्थ सोना अर्थात धन है।

(ii) तीन बेर खाती थी वे तीन बेर खाती है

यहां पर शब्द की आवृत्ति हुई है परंतु पहले बेर का अर्थ समय है(सुबह,दोपहर और शाम) और दूसरे बेर का अर्थ फल(बेर) है।

श्लेष अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में एक शब्द के दो या दो से अधिक अर्थ प्रकट हो तो वहां पर श्लेष अलंकार (Alankar) होता है।

उदाहरण:– 

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।                       पानी गए न ऊबरे, मोती, मानस, चून।।

यहां पर पानी शब्द के तीन अर्थ निकल रहे है। मोती के लिए चमक, मानस(मनुष्य) के लिए इज्जत और चून के लिए जल।

विरोधाभास अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में वास्तविक विरोध न होने पर भी विरोध का आभास होता है,परंतु अर्थ करने पर विरोध समाप्त हो जाता है तो वहां पर विरोधाभास अलंकार (Alankar) होता है।

उदाहरण:-

(i)  या अनुरागी चित्त की गति समुझै नहिं कोय।

     ज्यों- ज्यों बूड़ै स्याम रंग त्यों-त्यों उज्ज्वल होय।।

  (ii) तंत्री नाद  कवित्त रस सरस राग रति रंग।

     अनबूड़े बूड़े बूड़े तरे जे बूड़ै सब अंग ।।

विभावना अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में कारण नहीं होने पर भी कार्य का होना पाया जाता है तो वहां पर विभावना अलंकार (Alankar) होता है।

उदाहरण:- 

बिनु पग चले सुने बिनु काना, 

कर बिनु करम करै विधि नाना।

आनन रहित सकल रस भोगी, 

बिनु वाणी वक्ता बड़ जोगी।। 

अतिशयोक्ति अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में किसी व्यक्ति,वस्तु अथवा सौंदर्य का वर्णन लोक सीमा से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाता है तो वहां पर अतिशयोक्ति अलंकार (Alankar) होता है।

उदाहरण:- (i) हनुमान की पूंछ में, लगन न पाई आग।

                   लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।

(ii) जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ,                                        लील्यो ताहि मधुर फल जानू।

वक्रोक्ति अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में वक्ता द्वारा बोले गए कथन का श्रोता द्वारा अलग अर्थ ग्रहण किया जाता है तो वहां पर वक्रोक्ति अलंकार (Alankar) होता है।

उदाहरण:-  कौन द्वार पर? मैं हरि राधे!

                  यहां वानर का क्या काम

                  नहीं! मैं घनश्याम।

                  तो बरसों कित जाई।

आगे के दो अलंकार (Alankar) पढ़ने से पढ़ने  पहले उपमेय और उपमान को समझना जरूरी है

उपमेय:-  प्रस्तुत (वर्णित वस्तु) जो कवि के सामने होता है।जिसका कवि वर्णन कर रहा है।

उपमान:-  अप्रस्तुत जो कवि के सामने नही है। जिससे कवि उपमेय की तुलना या समानता स्थापित कर रहा है।

उदाहरण:-  चांद सा सुंदर मुख

  यहां पर मुख उपमेय है और चांद उपमान है।

संदेह अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में उपमेय और उपमान में समानता के कारण उपमेय में उपमान के होने का संदेह उत्पन्न होता है और यह संदेह अंत तक बना रहता है तो वहां पर संदेह अलंकार (Alankar)  होता है।

उदाहरण:- (i) सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।

             सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है ||

यहां पर यह निश्चित नहीं हो पा रहा है कि साड़ी के बीच नारी है या नारी के बीच साड़ी है।

 (ii) लक्ष्मी थी या दुर्गा थी या  स्वयं वीरता का अवतार |

भ्रांतिमान अलंकार

जहां काव्य पंक्ति में उपमेय में उपमान के होने का भ्रम उत्पन्न होता है या भूल से उपमेय को उपमान समझ लिया जाता है तो वहां पर भ्रांतिमान अलंकार (Alankar) होता है।

उदाहरण:-

(i)  ओंस बिंदु चुग रही हंसिनी मोती उनको जान।

 (ii)  जानि श्याम को श्याम-घन नाच उठे वन मोर।

संदेह अलंकार और भ्रांतिमान अलंकार में अंतर

 

  संदेह अलंकार

भ्रांतिमान अलंकार

1 इसमें संदेह वाचक शब्द होते है

इसमें भ्रम वाचक शब्द होते है।

2  इसमें अनिश्चय की स्थिति बनी रहती है।

इसमें झूठ निश्चित हो जाता है

3 हम स्वयं संदेह को दूर कर सकते है। 

भ्रम को दूर करना संभव नहीं है

पिछली परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न

अलंकार -Alankar

2024 में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न:- 1 जहां वास्तविक विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास हो, वहां……………अलंकार होता है।

प्रश्न:- 2 भगवान भागे दुःख जनता देश की फूले-फले।’ इस पंक्ति में निहित…………… अलंकार है।

2023 में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न:- 3 जब कोई शब्द अपने एक से अधिक अर्थ प्रकट करे तो उस शब्द के कारण वहां पर…………..अलंकार होता है।

प्रश्न:- 4 “कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।” काव्य पंक्ति में प्रयुक्त ………….. अलंकार है।

2022 में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न:- 5 ‘चारु-चंद्र की चंचल किरणें’ उक्त काव्य पंक्ति में……..वर्ण की आवृत्ति के कारण………अलंकार है।

प्रश्न:– 6  जहां शब्द की आवृत्ति हो किंतु अर्थ भिन्न हो वहां पर…………….अलंकार होता है।

2021 में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न:- 7 “तरनी तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।” पंक्ति में अलंकार है_

(अ) यमक     (ब) श्लेष     (स) अनुप्रास      (द)  उपमा

प्रश्न:- 8 उपमा अलंकार के अंग है_

(अ) चार         (ब) दो        (स)  एक           (द) तीन

स्पष्टीकरण:- यह अलंकार अब पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। उपमा अलंकार के चार अंग है_

(i) उपमेय – जिसकी तुलना की जाए अर्थात वर्णित वस्तु।

(ii) उपमान- जिससे तुलना की जाए अर्थात जिससे उपमा दी जाए।

(iii) समता वाचक शब्द – जिन शब्दों से समानता दर्शाई जाए। जैसे सा,सी,से,सरिस,सम,समान आदि

(iv) साधारण गुण धर्म–  जिस समान गुण के कारण तुलना की जाए। जैसे सुंदरता आदि

उदाहरण:- “चांद सा सुंदर मुख।” यहां पर चांद उपमान है, सा समता वाचक शब्द है, सुंदर साधारण गुण धर्म है और मुख उपमेय है।

2020 में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न:- 9 उपमा और रूपक अलंकार को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:- उपमा अलंकार- जहां काव्य पंक्ति में रंग, रूप, गुण, क्रिया और स्वभाव के कारण उपमेय की उपमान से तुलना या समानता(समता) स्थापित की जाती है तो वहां पर उपमा अलंकार होता है।

उदाहरण:- मुख चंद्रमा के समान सुन्दर है।

रूपक अलंकार- जहां काव्य पंक्ति में उपमेय में उपमान का आरोप किया जाता है अर्थात उपमेय को उपमान का रूप दे दिया जाता है तो वहां पर रूपक अलंकार होता है।

उदाहरण:- “चरण-सरोज पखारन लागा।”

स्पष्टीकरण:- अब ये दोनो अलंकार पाठ्यक्रम से जाता दिए है।

2019 में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न:- 10 “या अनुरागी चित्त की गति समुझै नहिं कोय।

             ज्यों- ज्यों बूड़ै स्याम रंग त्यों-त्यों उज्ज्वल होय।।”

उपर्युक्त काव्य पंक्ति में कौनसा अलंकार है, समझाइए।

उत्तर:- इसमें विरोधाभास अलंकार है। क्योंकि श्याम रंग(काले रंग ) रंग में डूबकर उज्ज्वल (सफेद) होना अर्थ विरोधी सा प्रतीत हो रहा है। परंतु अर्थ करने पर कृष्ण प्रेम से मन के पवित्र होने का आशय व्यक्त हो रहा है।

2018 में पूछे गए प्रश्न

प्रश्न:-11 “अजौ तरयौना ही रह्यो, श्रुति सेवत इक अंग। 

       नाक बास बेसरी लह्यो बसि मुकुतन के संग।।” 

उपयुक्त दोहे में कौनसा अलंकार है और क्यों?

उत्तर:- उपर्युक्त दोहे में श्लेष अलंकार है, क्योंकि  एक पक्ष में ‘तरयौना’ का अर्थ कान का आभूषण है और दूसरे पक्ष में ‘तरयौना’ का अर्थ तरा नही अर्थात निष्कृष्ट जीव है |

उत्तरमाला

प्रश्न 1 विरोधाभास,  2 अनुप्रास,  3 श्लेष,  4 यमक, 5 च और अनुप्रास, 6 यमक, 7 (स) , 8 (अ)

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